Author: mic1234567890

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  • शाकाहार की महिमा


    मनुष्य मांसाहारी है या शाकाहारी है….. पुरा पढ़िये
    एक बार एक चिंतनशील शिक्षक ने अपने 10th स्टेंडर्ड के बच्चों से पूछा कि आप लोग कहीं जा रहे हैं और सामने से कोई कीड़ा मकोड़ा या कोई साँप छिपकली या कोई गाय-भैंस या अन्य कोई ऐसा विचित्र जीव दिख गया, जो आपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा हो, तो प्रश्न यह है कि आप कैसे पहचानेंगे कि वह जीव अंडे देता है या बच्चे ? क्या पहचान है उसकी ?
    अधिकांश बच्चे मौन रहे जबकि कुछ बच्चों में बस आंतरिक खुसर- फुसर चलती रही… ।
    मिनट दो मिनट बाद
    फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने स्वयम ही बताया कि
    बहुत आसान है,, जिनके भी कान बाहर दिखाई देते हैं वे
    सब बच्चे देते हैं और जिन जीवों के कान बाहर नहीं
    दिखाई देते हैं वे अंडे देते हैं…. ।।
    फिर दूसरा प्रश्न पूछा कि-
    ये बताइए आप लोगों के सामने एकदम
    कोई प्राणी आ गया… तो आप कैसे पहचानेंगे की यह शाकाहारी है यामांसाहारी ?
    क्योंकि आपने तो उसे पहले भोजन करते देखा ही नहीं, बच्चों में फिर वही कौतूहल और खुसर फ़सर की आवाजें……
    शिक्षक ने कहा-
    देखो भाई बहुत आसान है,,
    जिन जीवों की आँखों की बाहर की यानी ऊपरी संरचना गोल होती है, वे सब के सब माँसाहारी होते हैं,
    जैसे- – कुत्ता, बिल्ली, बाज, चिड़िया, शेर, भेड़िया, चील या अन्य कोई भी आपके आस-पास का जीव-जंतु जिसकी आँखे गोल हैं वह माँसाहारी ही होगा है, ठीक उसी तरह जिसकी आँखों की बाहरी संरचना लंबाई लिए हुए होती
    है, वे सब के सब जीव शाकाहारी
    होते हैं, जैसे – हिरन, गाय, हाथी, बैल, भैंस, बकरी, इत्यादि ।
    इनकी आँखे बाहर की बनावट में लंबाई लिए होती है
    फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों से पूछा कि-
    बच्चों अब ये बताओ कि मनुष्य की आँखें गोल हैं या लंबाई वाली ?
    इस बार सब बच्चों ने कहा कि मनुष्य की आंखें लंबाई वाली होती है…
    इस बात पर
    शिक्षक ने फिर बच्चों से पूछा कि यह बताओ इस हिसाब से मनुष्य शाकाहारी जीव हुआ या माँसाहारी ?? सब के सब बच्चों का उत्तर था शाकाहारी ।
    फिर शिक्षक से पूछा कि
    बच्चों यह बताओ कि फिर मनुष्य में बहुत सारे लोग मांसाहार क्यों करते हैं ? तो इस बार बच्चों ने बहुत ही गम्भीर उत्तर दिया
    और वह उत्तर था कि अज्ञानतावश या
    मूर्खता के कारण।
    फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों को दूसरी बात यह बताई कि
    जिन भी जीवों के नाखून तीखे नुकीले होते हैं, वे सब के सब माँसाहारी होते हैं, जैसे- शेर, बिल्ली, कुत्ता, बाज, गिद्ध या अन्य कोई तीखे नुकीले नाखूनों वाला जीव…. और
    जिन जीवों के नाखून चौड़े चपटे होते हैं वे सब के सब शाकाहारी होते हैं, जैसे – मनुष्य, गाय, घोड़ा, गधा, बैल, हाथी, ऊँट, हिरण, बकरी इत्यादि ।
    इस हिसाब से भी अब ये बताओ बच्चों कि मनुष्य के नाखून तीखे नुकीले होते हैं या चौड़े चपटे ??
    सभी बच्चों ने कहा कि चौड़े चपटे,,
    फिर शिक्षक ने पूछा कि अब ये बताओ इस हिसाब से मनुष्य कौन से जीवों की श्रेणी में हुआ ?? सब के सब बच्चों ने एक सुर में कहा कि शाकाहारी ।
    फिर शिक्षक ने बच्चों से तीसरी बात यह बताई कि,
    जिन भी जीवों अथवा पशु-प्राणियों को पसीना आता है, वे सब के सब शाकाहारी होते हैं,
    जैसे- घोड़ा, बैल, गाय, भैंस, खच्चर, आदि अनेकानेक प्राणी… जबकि
    माँसाहारी जीवों को पसीना नहीं आता है, इसलिए कुदरती तौर पर वे जीव अपनी जीभ निकाल कर लार
    टपकाते हुए हाँफते रहते हैं इस प्रकार वे अपनी शरीर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं…. ।
    तो प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य को पसीना आता है या मनुष्य जीभ से अपने तापमान को एडजस्ट करता है ??
    सभी बच्चों ने कहा कि मनुष्य को पसीना आता है,
    शिक्षक ने कहा कि अच्छा यह बताओ
    कि
    इस बात से भी मनुष्य कौन सा जीव सिद्ध हुआ, सब के सब बच्चों ने एक साथ कहा
    शाकाहारी ।
    सभी लोग विशेषकर अहिंसा में, सनातन धर्म, संस्कृति और परम्पराओं में विश्वास करने वाले लोग भी चाहे तो बच्चों को नैतिक बौधिक ज्ञान देने अथवा सीखने-पढ़ाने के लिए इस तरह बातचीत की शैली विकसित कर सकते हैं,
    इससे जो वे समझेंगे सीखेंगे वह उन्हें जीवनभर काम आएगा… याद रहेगा, पढ़ते वक्त बोर भी नहीं होंगे…. ।
    * बच्चे अगर बड़े हो जाएं तो उनको यह भी बताएं कि कैसे शाकाहारी मनुष्य जानकारी के अभाव में मांसाहार का उपयोग करता है और कहता है कि जब अन्न नहीं उपजाया जाता था तब मनुष्य मांसाहार का सेवन करते थे, जो सरासर गलत है तब मनुष्य कंद-मुल एवं फलों पर जीवित रहते थे, जो सही है एवं उसके संरचना और स्वभाव से मेल भी खाता है।
    ॥ प्रकृति की ओर लौटिये तथा ईश्वर, भगवान, प्रभु से सच्चे अर्थों में जुड़िये ॥

  • Lakshi aur Ganesh ki puja saath saath kyon hote hai

    एक अदभुद जानकारी
    अंत तक अवश्य पढें
    बात उन दिनों की है जब हम कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्र थे. दशहरा बीत चुका था दीपावली समीप थी तभी एक दिन कुछ युवक युवतियों की ngo टाइप टोली हमारे कॉलेज में आई.

    उन्होंने स्टूडेंट्स से कुछ प्रश्न पूछे किन्तु एक प्रश्न पर कॉलेज में सन्नाटा छा गया.

    उन्होंने पूछा जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है ? राम की पूजा क्यों नही ?

    प्रश्न पर सन्नाटा छा गया क्योंकि उसवक्त कोई सोशलमीडिया तो था नही, स्मार्टफोन भी नही थे किसी को कुछ नही पता. तब सन्नाटा चीरते हुए हममें से ही एक हाथ प्रश्न का उत्तर देने हेतु ऊपर उठा

    हमनें बताया क्योंकि दीपावली उत्सव दो युग सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है. सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उसदिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मी पूजन होता है. भगवान राम भी त्रेता युग मे इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है. इसलिए इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपो से जुड़ा है.

    हमारे उत्तर के बाद थोड़ी देर तक सन्नाटा छाया रहा क्योंकि किसी को भी उत्तर नही पता था यहां तक कि प्रश्न पूछ रही टोली को भी नही. खैर सबने खूब तालियां बजाई. उसके बाद एक अखबार ने हमारा इंटरव्यू भी लिया. उस समय अखबार का इंटरव्यू लेना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी.

    बाद में पता चला कि वो टोली आज की शब्दावली अनुसार लिबरर्ल्स की थी जो हर कॉलेज में जाकर युवाओं के मस्तिष्क में यह डाल रही थी कि लक्ष्मी पूजन का औचित्य क्या जब दीपावली राम से जुड़ी है. कुल मिलाकर वह छात्रों का ब्रेनवॉश कर रही थी. लेकिन हमारे उत्तर के बाद वह टोली गायब हो गई.
    प्रश्न है
    लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है
    और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है

    सही उत्तर है

    लक्ष्मी जी जब सागरमन्थन में मिलीं और भगवान विष्णु से विवाह किया तो उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया तो उन्होंने धन को बाँटने के लिए मैनेजर कुबेर को बनाया। कुबेर बड़े ही कंजूस थे, वे धन बाँटते नहीं थे, खुद धन के भंडारी बन कर बैठ गए।
    माता लक्ष्मी परेशान हो गई, उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई। भगवान विष्णु ने उन्हें कहा कि तुम मैनेजर बदल लो, माँ लक्ष्मी बोली, यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं उन्हें बुरा लगेगा।
    तब भगवान विष्णु ने उन्हें गणेश जी की विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी।
    माँ लक्ष्मी ने गणेश जी को धन का डिस्ट्रीब्यूटर बनने को कहा, गणेश जी ठहरे महाबुद्धिमान, वे बोले, माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा, उस पर आप कृपा कर देना, कोई किंतु परन्तु नहीं। माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी !
    अब गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न/ रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे।
    कुबेर भंडारी रह गए, गणेश पैसा सैंक्शन करवाने वाले बन गए।

    गणेश जी की दरियादिली देख माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्रीगणेश को आशीर्वाद दिया कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें।
    दीवाली आती है कार्तिक अमावस्या को, भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं, वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद देव उठनी एकादशी को। माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिन, तो वे सँग ले आती हैं गणेश जी को, इसलिए दीवाली को लक्ष्मी गणेश की पूजा होती है।
    🙏🌹🙏
    (यह कैसी विडंबना है कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नही है औऱ जो वर्णन है वह अधूरा है)